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SIR क्या है? विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध

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पिछले कुछ महीनों से SIR शब्द ख़बरों में लगातार है। संसद से सड़क और सुप्रीम कोर्ट तक इस पर बहस चल रही है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि SIR क्या है, चुनाव आयोग इसे क्यों कर रहा है और विपक्ष इसका विरोध क्यों कर रहा है। SIR क्या है? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है, यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण। इसमें चुनाव आयोग के बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर हर वोटर की दोबारा जाँच करते हैं। चुनाव आयोग को यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 21 से मिलता है। ऐसा गहन पुनरीक्षण पिछली बार 2002 से 2004 के बीच हुआ था। अब तक क्या हुआ? पहला चरण जून से सितंबर 2025 के बीच बिहार में हुआ, जिसमें करीब 47 लाख नाम सूची से हटे। दूसरा चरण अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में हुआ। इसमें वोटरों की संख्या 50.99 करोड़ से घटकर 45.81 करोड़ रह गई, यानी करीब 10 प्रतिशत कम। सबसे ज़्यादा नाम उत्तर प्रदेश (लगभग 2 करोड़) और पश्चिम बंगाल (लगभग 84 लाख) में कटे। तीसरा चरण मई 2026 से 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है, जिसमें...

जानिए नरेंद्र मोदी को

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नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं और 2024 से अपने तीसरे लगातार कार्यकाल में हैं। उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा ज़िले के वडनगर में हुआ। आइए जानते हैं उनके बचपन, पढ़ाई, राजनीतिक सफ़र और शौक के बारे में। बचपन और पढ़ाई मोदी का बचपन वडनगर में बीता। उनके अपने अनुसार वे बचपन में पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में मदद करते थे। वडनगर में स्कूली पढ़ाई के बाद युवावस्था में उन्होंने घर छोड़ दिया और हिमालय समेत देश के कई हिस्सों की यात्रा की। उनके चुनावी हलफ़नामे के अनुसार उन्होंने 1978 में दिल्ली विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा के ज़रिए राजनीति विज्ञान में BA और 1983 में गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में MA किया। संगठन से राजनीति तक 1971 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्णकालिक प्रचारक बने। 1987 में वे भारतीय जनता पार्टी में आए और गुजरात में संगठन महामंत्री की ज़िम्मेदारी संभाली। 1998 में वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बने। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री अक्टूबर 2001 में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और 2014 तक इस पद पर रहे। यह गुजरात में किसी मुख्यम...

जानिए राहुल गांधी को

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राहुल गांधी अभी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट से सांसद हैं। उनका जन्म 19 जून 1970 को दिल्ली में हुआ। आइए जानते हैं उनकी पढ़ाई, काम, राजनीतिक सफ़र और शौक के बारे में। पढ़ाई राहुल गांधी ने शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलंबा स्कूल में की, फिर 1981 से 1983 तक देहरादून के दून स्कूल में पढ़े। 1984 में दादी इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से उनकी पढ़ाई घर पर हुई। 1989 में उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफ़ंस कॉलेज में इतिहास में दाख़िला लिया, फिर अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए। 1991 में पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से वे अमेरिका के फ्लोरिडा के रोलिंस कॉलेज में “राउल विंची” नाम से पढ़े और 1994 में BA किया। 1995 में उन्होंने ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट स्टडीज़ में M.Phil किया। राजनीति से पहले पढ़ाई के बाद उन्होंने लंदन की मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी Monitor Group में करीब तीन साल काम किया। 2002 में उन्होंने मुंबई में अपनी टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग कंपनी शुरू की। राजनीतिक सफ़र 2004 में वे सक्रिय...

खेत से खलिहान तक: किसानों के लिए हर PM का काम

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आज़ादी के समय भारत अनाज के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था। आज देश 35 करोड़ टन से ज़्यादा अनाज पैदा करता है और 1998 से दूध उत्पादन में दुनिया में पहले नंबर पर है। यह बदलाव कई दशकों की नीतियों और किसानों की मेहनत का नतीजा है। जानिए किस प्रधानमंत्री के समय किसानों के लिए कौन सा बड़ा काम हुआ। नेहरू (1947–64) पहली पंचवर्षीय योजना में खेती और सिंचाई पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया गया। भाखड़ा और हीराकुंड जैसे बड़े बांध बने। 1960 में पंतनगर में देश का पहला कृषि विश्वविद्यालय शुरू हुआ। लाल बहादुर शास्त्री (1964–66) अनाज की कमी और 1965 के युद्ध के बीच उन्होंने “जय जवान, जय किसान” का नारा दिया। 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), भारतीय खाद्य निगम (FCI) बने और फ़सलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था की नींव पड़ी। इंदिरा गांधी (1966–77, 1980–84) उनके समय हरित क्रांति आई। अधिक उपज वाले बीजों, सिंचाई और खाद से गेहूँ का उत्पादन कुछ ही सालों में लगभग दोगुना हो गया। 1970 में ऑपरेशन फ्लड शुरू हुआ, जिसने भारत को दूध में आत्मनिर्भर बनाया। 1982 में किसानों और गाँवों को कर्ज़ देने के लिए न...

देश के 23 IIT: किस PM के समय बने

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IIT यानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान हैं। 1951 में खड़गपुर से शुरू हुआ यह सफ़र आज 23 IIT तक पहुँच चुका है। आइए देखें कि कौन सा IIT किस प्रधानमंत्री के समय बना। नेहरू के समय (5 IIT) पहला IIT 1951 में खड़गपुर में बना। इसके बाद बॉम्बे (1958), मद्रास (1959), कानपुर (1959) और दिल्ली (1961) में IIT शुरू हुए। इन संस्थानों को बनाने में दूसरे देशों की भी मदद मिली: बॉम्बे को सोवियत संघ, मद्रास को पश्चिम जर्मनी, कानपुर को अमेरिका और दिल्ली को ब्रिटेन का सहयोग मिला। नरसिम्हा राव और वाजपेयी के समय (2 IIT) 1994 में नरसिम्हा राव सरकार के समय IIT गुवाहाटी शुरू हुआ। 2001 में वाजपेयी सरकार के समय रुड़की विश्वविद्यालय को IIT का दर्जा दिया गया। मनमोहन सिंह के समय (9 IIT) सबसे ज़्यादा नए IIT मनमोहन सिंह सरकार के समय बने। 2008 में भुवनेश्वर, गांधीनगर, हैदराबाद, पटना, रोपड़ और जोधपुर में IIT शुरू हुए। 2009 में इंदौर और मंडी में IIT खुले। 2012 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग संस्थान को IIT (BHU) वाराणसी का दर्जा मिला। मोदी के समय (7 IIT) 2015 मे...

1 डॉलर = कितने रुपये? 1947 से 2026

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सोशल मीडिया पर अक्सर कहा जाता है कि 1947 में 1 रुपया 1 डॉलर के बराबर था। यह बात सही नहीं है। आज़ादी के समय रुपया ब्रिटिश पाउंड से जुड़ा था और 1 डॉलर करीब ₹3.30 का था। आज, अक्टूबर 2026 में, 1 डॉलर करीब ₹94.92 का है। जानिए हर प्रधानमंत्री के दौर में डॉलर का भाव क्या रहा। सालवार भाव (लगभग, सालाना औसत) 1947 में ₹3.30 और 1964 में ₹4.76 (नेहरू)। 1966 में ₹7.50 और 1975 में ₹8.38 (इंदिरा गांधी)। 1984 में ₹11.36 और 1989 में ₹16.23 (इंदिरा और राजीव गांधी)। 1991 में ₹22.74 और 1996 में ₹35.43 (नरसिम्हा राव)। 1998 में ₹41.26 और 2004 में ₹45.32 (वाजपेयी)। 2014 में करीब ₹61 (मनमोहन सिंह से मोदी)। और 2026 में ₹94.92 (मोदी)। दो बड़े अवमूल्यन 1966 में इंदिरा गांधी सरकार ने रुपये का अवमूल्यन किया और 1 डॉलर ₹4.76 से बढ़कर ₹7.50 का हो गया। 1991 में विदेशी मुद्रा संकट के समय नरसिम्हा राव सरकार ने रुपये को करीब 18 प्रतिशत सस्ता किया। दोनों बार यह फ़ैसला सरकार ने खुद लिया था। रुपया क्यों गिरता है? भारत तेल और दूसरा सामान जितना बाहर से मँगाता है, उतना बेचता नहीं, इसलिए डॉलर की माँग ज़्यादा रहती है। भारत...

पेट्रोल, गैस और सोना: 2004 से 2026

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महँगाई हर घर की सबसे बड़ी चिंता है। पेट्रोल, रसोई गैस और सोने के दाम पिछले 22 सालों में कितने बदले? यहाँ तीन पड़ावों की तुलना है: मई 2004 (वाजपेयी से मनमोहन सिंह), मई 2014 (मनमोहन सिंह से मोदी) और अक्टूबर 2026। पेट्रोल (दिल्ली, प्रति लीटर) मई 2004 में पेट्रोल ₹33.71, मई 2014 में ₹71.41 और अक्टूबर 2026 में ₹102.12 प्रति लीटर था। यानी 2004 से 2014 के बीच दाम करीब 112 प्रतिशत और 2014 से 2026 के बीच करीब 43 प्रतिशत बढ़े। रसोई गैस (दिल्ली, 14.2 किलो सिलेंडर) मई 2014 में सब्सिडी वाला सिलेंडर ₹414 का था। अक्टूबर 2026 में यह ₹942 का है। आज आम ग्राहकों को सब्सिडी नहीं मिलती, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ₹300 की छूट मिलती है। इसलिए दोनों दामों की सीधी तुलना करते समय सब्सिडी का फ़र्क ध्यान में रखना ज़रूरी है। सोना (24 कैरेट, 10 ग्राम) 2004 में सोने का सालाना औसत भाव करीब ₹5,850 और 2014 में करीब ₹28,006 था। अक्टूबर 2026 में सोना करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर है। सोने का दाम दुनिया के बाज़ार से तय होता है, किसी सरकार के हाथ में नहीं। कच्चा तेल (ब्रेंट, प्रति बैरल) 2004 में कच्च...